वियतनामी लोककथा
आलसी बीज, धैर्यहीन किसान!
यह कहानी है एक ऐसे किसान की जो बहुत उतावला था, उसमें ज़रा भी धैर्य नहीं था। उसे यह पसंद नहीं था कि उसके खेत में बोए गए बीज धीरे-धीरे बढ़ रहे थे — उसे लगता था कि ये बीज ही आलसी हैं। इसलिए उसने सोचा कि वह बीजों की मदद करेगा ताकि फ़सल जल्दी से उग जाए। लेकिन इस जल्दबाज़ी का नतीजा यह हुआ कि उसने सारे पौधों को ही नुकसान पहुँचा दिया। अंत में उसके उतावलेपन के कारण उसे कोई फ़सल नहीं मिली। धैर्य और ध्यान से किया गया काम ही हमेशा अच्छा फल देता है।
















