बहुत समय पहले की बात है। एक राजा था। उसके तीन बेटे थे—पेड्रो, जुआन और होसे।
वे तीनों राजमहल में खुशी-खुशी रहते थे। लेकिन एक दिन बूढ़े राजा बीमार पड़ गए। उन्होंने दुनिया भर से वैद्य और हकीम बुलवाए, पर कोई भी उनकी मदद नहीं कर पाया। उनकी आँखों की रोशनी तेज़ी से जा रही थी। वे लगभग अंधे हो चुके थे, तभी पूर्व दिशा से एक वैद्य उनके दरबार में आया। उसने राजा से कहा कि उनके लिए केवल एक ही इलाज है - ओलिव यानि जैतून के फूलों से बनी एक दवाई। जब राजा ने यह सुना, तो उन्होंने उस समझदार वैद्य को धन्यवाद दिया और उसे बहुत सारा सोना इनाम में दिया। राजा बहुत खुश हुए, लेकिन तभी उन्हें एहसास हुआ कि उनके राज्य में कहीं भी जैतून के पेड़ नहीं उगते। उन्होंने तुरंत अपने तीनों बेटों को बुलाया और उनसे कहा कि वे उनके लिए जैतून के फूल ढूँढ़कर लाएँ, ताकि दवाई तैयार की जा सके।
सबसे बड़ा बेटा आगे बढ़ा और अपने पिता से बोला,“मैं आपकी आज्ञा मानकर जैतून के फूल खोजने जाऊँगा। लेकिन पूरी दुनिया में जाकर इसे ढूंढ़ने में बहुत धन लगेगा। पिता का धन पाने का जो मेरा अधिकार है, वह हिस्सा मुझे अभी दे दीजिए, तब मैं अपनी यात्रा शुरू करूँगा।” राजा ने उसे धन दे दिया।
वह दूर-दूर तक गया। कई हफ़्ते बीत गए, महीने गुजर गए, लेकिन उसे एक भी जैतून का पेड़ नहीं मिला। एक दिन रास्ते में उसकी मुलाकात एक झुर्रियों वाली बूढ़ी औरत से हुई। उसने उससे कहा, “कृपा करके, दयालु महाशय, मुझे एक-दो सिक्के दे दीजिए, या अपना थोड़ा-सा खाना मुझे दे दीजिए। मैंने दो दिन से कुछ नहीं खाया है।” लेकिन पेड्रो दयालु नहीं था। उसने उसे केवल घूरकर देखा और बिना कुछ दिए आगे बढ़ गया। वह कई…