एक बार की बात है, एक छोटे-से पहाड़ी कस्बे में एक टेनिस कोर्ट था जो अब पूरी तरह से वीरान हो चुका था। कभी इसकी मिट्टी की सतह चमकीले नारंगी रंग की हुआ करती थी, लेकिन अब न वो चमक बची थी, न ही वो रंग। ये कोर्ट एक खेल के मैदान का हिस्सा था, जो नई बनी फैमिली हाउसिंग कॉलोनी के बीचोंबीच था, लेकिन वहाँ के बच्चे यहाँ टेनिस खेलते ही नहीं थे। कितने अफ़सोस की बात है ना?
बच्चों, क्या आपने कभी टेनिस खेला है? टेनिस खेलने के लिए बस दो रैकेट और एक गेंद की ज़रूरत होती है। आप ये कहीं भी खेल सकते हो: घास पर, किसी शांत गली में जहाँ ट्रैफिक न हो, या किसी असली टेनिस कोर्ट पर — जिसकी सतह या तो सख़्त हो सकती है या इस कोर्ट की तरह मुलायम मिट्टी वाली।
फिर एक दिन, एक छोटी-सी लड़की एनेट अपनी मम्मी-पापा के साथ इसी कॉलोनी में एक सुंदर नीले दरवाज़े वाले घर में रहने आई जो टेनिस कोर्ट के बहुत पास था। उसने अपने नए कमरे की खिड़की से बाहर देखा और अपनी माँ से पूछा:
"मम्मी, वो मैदान इतना गंदा क्यों है?" वो सही कह रही थी। वहाँ जंगली घास उग आई थी, और मैदान अब भी पतझड़ के सूखे पत्तों से ढका हुआ था। टेनिस कोर्ट पर भी काई जम गई थी और सूखी टहनियाँ बिखरी हुई थीं।
उसकी मम्मी को भी नहीं पता था कि कोई उस मैदान की देखभाल क्यों नहीं कर रहा था, लेकिन उन्होंने एनेट को समझाया कि जो हिस्सा चारों तरफ से जाली से घिरा है, वो दरअसल एक टेनिस कोर्ट है।
अगले हफ़्ते, जब एनेट और उसकी मम्मी शहर में नए घर के लिए कुछ सामान लेने गईं, तो उन्हें रास्ते में एक खेल सामग्री की दुकान दिखी…