शाम हो गई है और अब सोने का समय है। बाहर अंधेरा होने लगा है और सड़कें भी अब शांत हो गई हैं। बस आधी खुली खिड़की से हल्की-सी पत्तों की सरसराहट और दूर-दराज़ से आती गाड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है।
आओ, रज़ाई के नीचे आ जाओ और खुद को आराम से इससे ढक लो। अपनी आँखें बंद करो और दूर से आने वाली इन शांत, प्यारी आवाज़ों को सुनो।
अगर तुम ध्यान से सुनोगे, तो बाहर की आवाज़ों के साथ-साथ पंखों की हल्की-सी फड़फड़ाहट भी सुनाई देगी। अचानक, जाने कहाँ से, एक बहुत बड़ी तितली कमरे में उड़ती हुई आ जाती है। तुम सोचते हो कि तितलियाँ तो अब तक सो चुकी होंगी — लेकिन यह तो एक बड़ा, गहरा रंगों वाला रात का पतंगा है।
यह अपने लाल और काले पंख फड़फड़ाती है और जैसे वह चुपके से तुमपर हँस रहा हो। पहले वह तुम्हारे हाथ पर बैठा, फिर तुम्हारे माथे पर। फिर वह पूरी तरह गायब हो गया और एक पल में रज़ाई के अंदर आ गया।
वह तुम्हारे पैरों को गुदगुदाता है, धीरे से हँसकर तुम्हारे पैर की उंगली पर बैठता है और फिर से फड़फड़ाते हुए उड़ जाता है। उसके पंखों की फड़फड़ाहट ही बताती है कि वह इस समय कहाँ उड़ रही है।
यह पतंगा शरारती है, लेकिन प्यारा भी है। बस बिस्तर में चुपचाप लेटे रहो, ताकि वह डर न जाए, और देखो वह कैसे उत्सुकता से तुम्हारी रज़ाई पर बैठा है। अब तुम उसे पास से देख सकते हो। तुम देखोगे कि यह आम तितलियों से थोड़ा अलग दिखता है।
इसके पूरे शरीर पर बारीक बाल हैं। यह फूला-फूला लगता है, जैसे कोई नर्म, मुलायम सा खिलौना। इसके पंखों को देखो। इतने छोटे से शरीर के लिए ये कितने बड़े हैं। देखो कैसे लाल…