क्यों नहीं की सूरज ने शादी

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यह बुल्गेरियन लोककथा उस समय की है जब सूरज ने शादी करने की योजना बनाई थी लेकिन वह शादी कभी नहीं हो सकी। शादी की इन योजनाओं को एक छोटी सी हेजहॉग ने रोक दिया। उसे यह समझ आ गया था कि अगर आकाश में एक पूरे सूरज परिवार की गर्मी आ गई, तो उसके परिणाम कितने भयानक होंगे। यह परीकथा आज के पर्यावरणीय मुद्दों की ओर भी इशारा करती है।
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एक धूप भरे दिन की बात है। सूरज ने तय किया कि उसको अकेले रहना अच्छा नहीं लग रहा, इसलिए उसने मन बना लिया कि अब वह एक परिवार शुरू करेगा। इस शानदार विचार का जश्न मनाने के लिए उसने एक बड़ी पार्टी रखने की सोची और दुनिया के हर कोने से जानवरों को आमंत्रित किया।

सभी मेहमान बहुत उत्साहित थे। उन्हें पार्टी का बेसब्री से इंतज़ार था। लेकिन, शायद सभी नहीं। जब छोटी सफेद कांटेदार हेजहॉग, यानि वो छोटी सी जानवर, जिसकी पीठ में कांटे होते हैं, उसे निमंत्रण मिला, तो वह डर के मारे दौड़कर अपने घर भाग गई और बिस्तर के नीचे छिप गई।

बाकी जानवर उसकी इस हरकत से बहुत हैरान थे, और कुछ तो बिल्कुल चौंक ही गए। कोई समझ नहीं पा रहा था कि वह पार्टी में जाने से क्यों डर रही है।

वे सब उसे मनाने उसके घर पहुँचे। सबसे पहले मेंढक ने कहा: "हेजहॉग , तुम्हें तो पार्टी में ज़रूर आना चाहिए। सूरज ने तुम्हें बुलाया है, और सबको उम्मीद है कि तुम ज़रूर आओगी।"

बाघ ने भी कोशिश की: "अगर तुम नहीं आईं, तो सूरज बहुत नाराज़ हो जाएगा। तुम्हारा अस्तित्व उसी के कारण है, पूरी प्रकृति उसी की देन है। उसके निमंत्रण को ठुकराना तो बहुत ही अपमानजनक बात होगी!"

फिर सुंदर घोड़ा भी आ गया। एक-एक करके सारे जानवर उसे समझाने लगे, जब तक कि आखिरकार ज़िद्दी हेजहॉग मान नहीं गई: "ठीक है, ठीक है, मैं आऊँगी! मैं आऊँगी!" उसने चिल्लाते हुए कहा।

पल भर में वह दिन आ गया जब जश्न मनाया जाना था। सूरज ने एक बेहद शानदार पार्टी दी, और सभी ने खूब खाया-पीया और आनंद लिया। सभी मेहमानों को खुश देखकर सूरज भी बहुत प्रसन्न हुआ।

सिर्फ छोटी सी हेजहॉग पीछे चुपचाप बैठी रही, उसने तो अपने खाने…

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