ग्रिम भाई
जादुई बौने और मोची
इस प्रचलित परी कथा में, आप एक असाधारण घटना के बारे में पढ़ेंगे जो एक गरीब, साधारण मोची के साथ घटी। यह जानने के लिए इसे पढ़ें कि उसकी वर्कशॉप में क्या जादू हुआ और दयालुता, उदारता और आपसी मदद की इस कहानी का आनंद लें।


एक बार की बात है। एक बूढ़ा किसान अपने धारीधार बिल्ले के साथ जंगल के किनारे एक घर में रहता था। जैसे-जैसे बिल्ला बूढ़ा हो रहा था,वह कमजोर होता जा रहा था। कुछ दिनों बाद वो इतना कमज़ोर हो गया कि वो दिनभर ओवन के ऊपर बैठा रहता और खर्राटे
किसान को याद भी नहीं था कि बिल्ले ने आखरी बार कब एक भी चूहा
और किसान ने ऐसा ही किया। उसने बिल्ले को उठाया। उसे घने,गहरे जंगलों तक
जब उसे बिल्ले ने होश संभाला, तो अपने आसपास देखा और उसे एक पतली, लाल लोमड़ी दिखाई दी।
“तुम कौन हो?” लोमड़ी ने पूछा।
“मैं बिल्लियों के नगर से श्रीमान बिल्ला हूँ,” बिल्ले ने कहा।
“वैसे तुम काफ़ी अच्छे लग रहे हो?” लोमड़ी ने जवाब दिया। “अगर तुम्हारे पास और कहीं जाने की जगह नहीं है, तो मेरे साथ चलो। तुम मेरे पति बन जाओ और मैं तुम्हारी पत्नी बन
बिल्ला मान गया, और लोमड़ी उसे अपनी गुफा में ले आई।
कुछ दिनों बाद, लोमड़ी जंगल में सैर कर रही थी कि उसे उसका दोस्त ख़रगोश मिला।
“ओह, मेरी दोस्त, श्रीमती लोमड़ी,” उसने पुकारा, “कितना समय हुआ तुमसे मिले! अगली बार मैं तुम्हारी गुफा के पास से निकलूंगा तो ज़रूर तुमसे मिलने तुम्हारे घर आऊँगा।“
“अच्छा होगा तुम ना ही आओ,” लोमड़ी ने उसे रोकते हुए कहा, “बिल्ली नगर के श्रीमान बिल्ला अब मेरे साथ रहते हैं। अगर उन्होंने तुम्हें देख लिया तो तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े