एक बार की बात है। जंगल के पास एक घर में एक बूढ़ा किसान और उसका धारीधार बिल्ला रहते थे। बिल्ले के शरीर पर धारियां थीं। जैसे-जैसे बिल्ला बूढ़ा हो रहा था, वह आलसी भी होता जा रहा था। धीरे-धीरे वह इतना आलसी होता गया, कि वह दिनभर ओवन पर बैठा रहता और खर्राटे भरता रहता। और वो भी ज़ोर-ज़ोर से - ‘खर्र! खर्र!’ यह सुन-सुनकर किसान का दिमाग़ ख़राब होने लगा था।
किसान को याद भी नहीं था कि बिल्ले ने आखरी बार कब एक चूहा भी पकड़ा था। एक दिन, उसने सोचा, “ये बूढ़ा, आलसी बिल्ला जो सारा दिन ओवन पर बैठा रहता है, वह मेरे किस काम का? मैं इसे जंगल में ले जाकर छोड़ आता हूँ। वह जहाँ चाहे जा सकता है वहाँ से और अपना ध्यान ख़ुद रख सकता है, कम से कम ज़िन्दगी में एक बार।“
किसान ने बिल्ले को उठाया। बिल्ला उठाये जाने पर शोर मचाने लगा पर फ़िर भी किसान उसे दूर जंगल में ले गया, और उसे वहाँ छोड़ दिया।
अब बिल्ला बहुत परेशान था। वह अच्छा-भला सो रहा था, पर अचानक उसे कहीं पर उठाकर ले जाया गया था और अब, वह अकेला यहाँ जंगल में था। उसे दो पल लगे यह समझने में कि उसके साथ क्या हो गया था। उसने आसपास देखा तो उसे एक पतली, लाल लोमड़ी दिखाई दी।
“तुम कौन हो?” लोमड़ी ने पूछा।
“मैं बिल्लियों के नगर से श्रीमान बिल्ला हूँ,” बिल्ले ने कहा।
“एक बात कहूँ?” लोमड़ी बोली। “मुझे तुम पसंद हो। अगर तुम्हारे पास और कहीं जाने की जगह नहीं है, तो मेरे साथ चलो। तुम मेरे पति बन जाओ और मैं तुम्हारी पत्नी बन जाती हूँ।“
किसी का पति बनने का सुझाव बिल्ले को बहुत पसंद आया, और इसलिए लोमड़ी उसे अपनी कुटिया में ले आई। उसका घर बहुत…