एक बड़ी ज़मीन के किनारे स्थित एक छोटे से घर में ल्यूक नाम का एक छोटा लड़का रहता था। उसे आइस स्केटिंग करना बहुत पसंद था। सर्दियों में जब अंधेरे से घिरी गंदी गलियों को ढकते हुए, आसमान से बर्फ़ के गुच्छे गिरते थे, तो उसकी खुशी देखते ही बनती थी। वह जानता था कि बर्फ़ गिरने का मतलब है कि बहुत जल्दी ही कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है और सारे तालाब जम जाएंगे।
ल्यूक को जमे हुए तालाब पर आइस स्केटिंग करना सबसे ज्यादा अच्छा लगता था। उसे अपने स्केट्स से बर्फ़ को खरोंचने पर आने वाली आवाज़ सुनकर मज़ा आता था और उसे अपनी माँ की भाप छोड़ती थर्मस से गर्म चाय पीना बहुत पसंद था। ल्यूक हमेशा तालाब के एक छोर पर सावधानी से स्केटिंग करते हुए दूसरे छोर पर बड़े लड़कों को हॉकी खेलते देखता था। वह भी उनके साथ हॉकी खेलना चाहता था, लेकिन उसके पास हॉकी स्टिक नहीं थी।
उसकी माँ ने उससे कहा, "धीरज रखो, पहले तुम्हें अच्छी तरह से स्केटिंग सीखनी होगी।"
कभी-कभी, ल्यूक तालाब की ओर जाते हुए एक लंबी छड़ी उठा लेता और एक कंकड़ लेकर उसे ‘पक’ की तरह बर्फ़ पर मारने की कोशिश करता। पक एक छोटी, कठोर रबर डिस्क होती है और आइस हॉकी में खेलने के लिए बॉल के बजाय इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह मुश्किल काम था। अगर उसके पास खेलने के लिए आवश्यक चीजें नहीं होंगी तो लड़के उसे अपने साथ खेलने नहीं देंगे। आप किसी भी पुरानी स्टिक से हॉकी नहीं खेल सकते!
जब बाहर इतनी ठंड नहीं होती थी कि तालाब पर स्केटिंग की जा सके, तब ल्यूक हमेशा रविवार का इंतजार करता था, क्योंकि यही वह दिन था जब उसके पिता उसे आइस रिंक ले जाते थे। आइस रिंक यानी बर्फ़ की पट्टी वाला…