Tereza Sebesta
बर्फ़ की आख़िरी बूंद
सुबह-सुबह, एक लटकी हुई बर्फ की बूंद एक नल के ऊपर जागी और एक नया दिन देखकर बहुत खुश हुई। लेकिन... यह क्या है? उसे एहसास हुआ कि वह गलती से बहुत देर से जागी थी। सर्दियां खत्म हो चुकी थीं। अब वह क्या करेगी?


वे फिर से वहां मौजूद थे- गंदे कीटाणु और
अफसोस की बात तो यह थी कि एक ही जगह पर बैठे-बैठे वे ऊब गए थे और किसी यात्रा पर जाने के मौके का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अगले ही पल, शौचालय की
“दोस्तों, चलो!” सबसे बड़ा, सबसे मोटा कीटाणु चिल्लाया। बाकी कीटाणुओं ने खुशी-खुशी उसकी बात मान ली। वे सभी आगे बढ़े और जेक के हाथों की हथेलियों पर
“वाह! आखिरकार हमें मज़ेदार यात्रा पर जाने का मौका मिल गया!” वे एक स्वर में खुशी से चिल्लाए। लेकिन सबसे बड़े कीटाणु ने तुरंत उन्हें बीच में ही टोक दिया।
“इतनी जल्दी खुश होने की जरूरत नहीं है, दोस्तों। अगर लड़के ने बाद में अपने हाथ धो
थोड़ी देर बाद लड़का शौचालय सीट से उठा और उसने फ्लश
अरे वाह! कीटाणु अब जश्न मना सकते थे, क्योंकि जेक ने लापरवाही बरती और हाथ