अब बहुत देर होने लगी थी। बाहर छिपता सूरज, बादलों को सुनहरे और गुलाबी रंग में बदल रहा था। माँ-पिताजी रात के खाने के बाद मेज़ साफ़ कर रहे थे। छोटी बच्ची सूज़ी, जिसका पेट काफ़ी भरा हुआ था, धीरे से अपनी कुर्सी से खिसकी और अपने खिलौनों की तरफ़ भाग गई। कुछ देर पहले ही उसने खेलने वाले ब्लॉक की मदद से एक पुल बनाया था और अब वो उसके नीचे से एक खिलौने वाली ट्रेन को आगे पीछे चलाना चाहती थी।
“सूज़ी तुम थोड़ी देर और खेल सकती हो, उसके बाद तुम्हें अपने पाजामे पहनने होंगे, ठीक है?” उसकी माँ ने उसे बताया।
“नहीं माँ, मुझे थोड़ी देर और खेलना है!” सूज़ी ने विरोध जताते हुए कहा।
सूज़ी अभी कुछ ही दिन पहले चार साल की हुई थी। उसके बाल चोटी बनाने लायक बड़े हो गए थे और अभी 6 महीने पहले ही उसने प्री स्कूल जाना शुरू किया था। उसे वहाँ जाना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि वहां बहुत तरह के खिलौने थे और सूज़ी को खेलना बहुत पसंद था। वह बिल्डिंग ब्लॉक से इमारतें बनाती, गुड़िया के घर को सजाती और बच्चों की रसोई में खाना बनाती। उसे तस्वीरें बनाना भी बड़ा पसंद था, वह ट्रेन की पटरी को जोड़ती और खिलौने के जीवों को भी सिखाती कि ये सब कैसे करना है।
घर पर भी हर रात यही कहानी होती थी। वह ज़्यादा देर अपने आप को खिलौनों से दूर नहीं रख पाती थी और उसे सुलाने के लिए बिस्तर तक लाना उसके माँ-पिताजी के लिए बहुत ही मुश्किल काम होता था। आज शाम भी कुछ ऐसा ही हुआ।
माँ पिताजी ने रसोई की साफ़-सफ़ाई कर ली थी, “सूज़ी मैंने तुम्हारे बिस्तर पर जाने से पहले, पीने के लिए दूध गर्म कर के रख दिया है,” सूज़ी के पिता ने कहा।
“पर…