एक बार की बात है, एक छोटा हाथी था। उसका नाम था बम्बो। कभी-कभी शाम को छोटा हाथी आसमान में टिमटिमाते तारों को देखता और सोचता कि एक अंतरिक्ष यात्री होना कैसा होता होगा।
वह सोचता कि वह अपने अंतरिक्ष यान में बैठ पूरे अंतरिक्ष में स्थित आकाशगंगाओं की सैर करेगा और नए ग्रह खोजेगा। यह सब इस धरती पर रहने से तो और भी मज़ेदार होगा। मगर बम्बो अच्छी तरह से जानता था कि वह छोटा तो है, मगर तारों तक उड़ कर जाने के लिए बहुत भारी है। और फिर उसके पास कोई रॉकेट भी नहीं था। तो वह ऊपर चमकते तारों को देखता और एक दुखभरी आह भरकर रह जाता।
मगर आज रात एक अजूबा हुआ! जब हाथियों का उसका परिवार सो गया, बम्बो ने भी आख़िरी बार जम्हाई ली और वह भी सो गया। जल्द ही उसने एक अनोखा सपना देखा।
उसको सपने में वही सब कुछ दिखा जो वह दिनभर सोचा करता था: कि वह एक अंतरिक्ष यात्री है और वह अंतरिक्ष के एक मज़ेदार सफ़र के लिए निकल रहा है। तो हम भी उसके साथ चलते हैं। बस अपनी आँखें बंद करो और हमारे विचार हमें बम्बो के साथ ले चलेंगे, पूरे अंतरिक्ष में आकाशगंगा की एक अनूठी सैर पर। देखो, रॉकेट उड़ने को तैयार है।
इसमें बैठते हैं और धीरे से तारों की ओर उड़ चलते हैं। अपनी छोटी सी खिड़की से आप देख सकते हैं कि कैसे पृथ्वी दूर होती जा रही है। हम बादलों के बीच से निकल रहे हैं जो पलक झपकते पीछे जाते जा रहे हैं क्योंकि हम बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। जल्द ही, हम बम्बो के साथ बाहरी अंतरिक्ष में पहुँच जाते हैं जहाँ अंधेरा है।
हमारा ग्रह बहुत पीछे छूट चुका है। देखो, दूर से पृथ्वी केवल नीली दिखाई देती है। यह इसलिए…