ईमानदार लक्कड़हारा

7
 मिनट
5
+
4.76
 • 
1194
 मूल्यांकन
ईमानदारी का फल मीठा होता है। एक लकड़हारा पेड़ काट रहा था, तभी उसकी कुल्हाड़ी हाथ से फिसल गई और पहाड़ी नदी की गहराई में गिर पड़ी। सौभाग्य से, देवता बुध ने देखा कि लकड़हारा कुल्हाड़ी गिरने से कितना दुखी है और उस की मदद करने का फैसला किया। लेकिन इससे पहले, उन्होंने लकड़हारे की परीक्षा लेने का निश्चय किया।
आप इस परियों की कहानी को मुफ्त में PDF के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं और इसे प्रिंट कर सकते हैं। Readmio ऐप में, आपके पास हर परियों की कहानी के लिए यह विकल्प उपलब्ध है। डाउनलोड:
ईमानदार लक्कड़हारा
QR kód
इस कहानी को ऐप में खोलने के लिए इस QR कोड को स्कैन करें।
Mio की टिप
🔊 हाइलाइट किए गए शब्दों पर टैप करें ताकि ध्वनियाँ चल सकें

बहुत समय पहले की बात है। कहीं दूर पहाड़ियों पर, एक छोटा सा गाँव था। वहाँ एक बूढ़ा लकड़हारा रहता था। वो एक सादा सा जीवन जीता और बहुत मेहनत करता जिससे अपने परिवार का भरणपोषण अच्छे से कर सके।

गाँव में पहाड़ों से एक नदी आती थी, उसी के पास एक जगह थी जहाँ वह पेड़ काटता था। काटी हुई लकड़ी को वो पानी के रास्ते नदी किनारे एक छोटे गाँव तक पहुँचा देता । उस गाँव में रहने वाले लोग उन बहते तनों को पकड़ लेते और उस लकड़ी से कटोरे और फर्नीचर आदि ज़रूरत का सामान बनाते

एक दिन, जब वह एक पेड़ काट रहा था, उसके हाथ से कुल्हाड़ी फिसलकर नदी में जा गिरी। लकड़हारे ने उसे बचाने की कोशिश भी नहीं की क्योंकि नदी का बहाव बहुत तेज़ था और ख़तरनाक भी। दुखी होकर वह वहीं बैठ गया और रोने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि बिना कुल्हाड़ी के उसका गुज़ारा कैसे होगा।

उसी समय बुध, जो व्यापार और लाभ के देवता माने जाते हैं, वहाँ से गुज़र रहे थे। उन्होंने लकड़हारे के रोने की आवाज़ सुनी, तो सोचा, जाकर देखना चाहिए, हुआ क्या है। जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक बूढ़ा आदमी, नदी के पास अपनी कुल्हाड़ी खो जाने के कारण रो रहा था। उन्होंने तय किया कि वे उसकी मदद करेंगे। वे पानी के अंदर गए और एक सोने की कुल्हाड़ी निकाल लकड़हारे के पास ले आए

“धन्यवाद, बुध देवता, मगर यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है,” लकड़हारे ने कहा। “यह कुल्हाड़ी बहुत सुंदर है, मगर मुझे मेरी पुरानी वाली कुल्हाड़ी ही पसंद है। उसे मैं आसानी से पकड़ भी पाता हूं। क्या आप, मेरे लिए फिर एक बार नदी में देखेंगे, शायद आपको मेरी कुल्हाड़ी मिल जाए?” वह बोला।

देवता बुध हैरान थे कि…

Tuto a další pohádky najdete v Readmio

... पूरी कहानी Readmio में पाएं।

Readmio एक ऐप है जो परियों की कहानियों और सोने से पहले की कहानियों से भरा हुआ है। आपकी आवाज़ से सक्रिय होने वाली ध्वनियों के साथ, ये कहानियाँ और भी जीवंत हो जाती हैं। कई कहानियाँ मुफ्त हैं, और हर हफ्ते नई कहानियाँ जोड़ी जाती हैं।

मुफ़्त में आज़माएं

iOS, Android और वेब के लिए उपलब्ध है

Download from App StoreDownload from Google Play
RatingsRatingsRatingsRatingsRatings

4.8/5 · 10 000 मूल्यांकन

श्रेणी में और भी देखें लघु कथाएँ

सदाबहार पेड़ कभी अपने पत्ते क्यों नहीं खोते

सदाबहार पेड़ कभी अपने पत्ते क्यों नहीं खोते

8
 min
3
+
4.83

शरद ऋतु में कुछ पेड़ों के पत्ते क्यों गिर जाते हैं, लेकिन कुछ के नहीं? जानें सर्दियों की इस प्यारी सी परी कथा में। क्रूर उत्तरी हवा और कुछ मददगार पेड़ों से मिलें जो टूटे पंख वाली एक छोटी सी रॉबिन को अपने घर में ले जाते हैं। उन्हें उनकी दयालुता के लिए एक अप्रत्याशित इनाम मिलता है!

टिड्डा और चींटियाँ

टिड्डा और चींटियाँ

6
 min
5
+
4.56

ऐसोप की इस प्रसिद्ध कहानी के इस रूपांतर से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें हमेशा भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। जब युवा टिड्डे ने देखा कि गर्मी के मौसम में चींटियाँ ठंड के लिए सामान इकट्ठा कर रही थीं, तो वह हँस पड़ा। इतने अच्छे मौसम में कोई कैसे काम कर सकता है? लेकिन दिन बीतते गए, और जल्द ही सूरज की गर्मी और रोशनी की जगह ठंडी बर्फ ने ले ली। जहाँ चींटियों के पास सब कुछ तैयार था, वहीं टिड्डे को किसी ऐसे का इंतज़ार करना पड़ा जो उस पर दया कर दे।

भालू जो सो नहीं सका

भालू जो सो नहीं सका

8
 min
3
+
4.75

सर्दी आ रही है और सभी जानवर शीतनिंद्रा में जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन यह भालू किसी तरह से आराम से नहीं सो पा रहा है। उसे एक उपयुक्त बर्फ की चादर की जरूरत है। चिड़चिड़ा और नींद में डूबा हुआ, वह एक असाधारण जगह पर पहुंच जाता है: शहर में, बच्चों के बीच। क्या भालू आखिरकार सो पाएगा?