Hans Christian Andersen
टिन का अटल सैनिक
हैंस क्रिश्चियन एंडरसन की पारंपरिक कहानी में, आप एक टिन के सैनिक के भाग्य के बारे में जानेंगे जो दूसरों से थोड़ा अलग है। वह एक अप्रत्याशित साहसिक यात्रा पर जा रहा है- उसके साथ इस यात्रा का अनुभव करें!


एक सुबह, हमारी कहानी के हीरो मिस्टर ग्रे वुल्फ, फेयरीवर्क्स के मुख्य दफ्तर में घबराकर इंतज़ार कर रहे थे। यह परियों की कहानियों वाली कंपनी थी और उनका यह पहला दिन था।
दफ्तर बहुत
“आपको पहले काम की शुभकामनाएँ,
मिस्टर ग्रे ने ठान लिया कि वह सब कुछ किताब के हिसाब से करेंगे। वह जल्दी से नक्शा अपने पंजों में लेकर बाहर निकल पड़े जिससे कि वो जल्दी से जल्दी बकरियों के घर पहुंच सकें। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि सात शरारती बकरी के बच्चे परदे के पीछे से उन्हें देख रहे थे। जैसे ही उन्होंने नए भेड़िये को देखा, उन्हें एक मजेदार
वे जल्दी से बाहर आए और अपने दरवाज़े पर लगे सात छोटे बकरे के नाम के ऊपर एक कागज़ चिपका दिया। फिर उस पर तीन सूअरों के चेहरे बनाकर लिख दिया, “तीन छोटे सूअर”।
जब मिस्टर ग्रे वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने पढ़ा,“तीन छोटे सूअर”।
उन्होंने नक्शा देखा, फिर दरवाज़ा, फिर नक्शा। फिर वो अपने लंबे से कान खुजलाते हुए बोले,“लगता है उनसे मुझे ये दिशाएँ देने में गलती हो गई है। तीन छोटे सूअर तो श्रीमान बिग बैड वुल्फ का काम है। हो सकता है उन्होंने मुझे ग़लत जगह भेज
वह बड़बड़ाने लगे और थोड़ी देर सोचने के बाद उन्होंने आखिर तय किया कि वह दरवाज़ा खटखटाऐंगे। उसने पूछा,
“क्या सात छोटे बकरे यहां रहते हैं?”
अंदर से बकरे हंसे और चिल्लाए,
“नहीं-नहीं, हम…