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शुभरात्रि, खेत के पशुओं
यह सोने से पहले की कहानी हमें एक व्यस्त फार्म पर ले जाती है, जहाँ दिन ढलने तक जानवर चैन की नींद के लिए तैयार हो जाते हैं। बच्चे फार्म के सभी जानवरों को शुभरात्रि कह सकते हैं और सोने की तैयारी कर सकते हैं।


एक घने, गहरे जंगल में एक बहुत बूढ़ा बलूत का पेड़
यह बड़ा पेड़ बहुत फैला हुआ था, जिससे की बारिश की अधिकतर बूँदें इसकी बड़ी-बड़ी पत्तियों पर ही
कुछ दिन पहले पेड़ की घनी पत्तियों में कबूतरों का एक परिवार रहने आया। उनके मधुर संगीत ने वातावरण को और भी सुंदर
नन्हे कबूतरों के लिए तो यह जगह रेगिस्तान में पानी के समान थी। वे यहाँ आराम से अपने नर्म घोंसले में दुबके, अपनी आँखें बंद कर अपनी ताकत बना सकते थे। वे यहाँ सुंदर सपने देख सकते थे कि कैसे एक दिन वो भी अपने पंख फैला के आसमान में ऊँचे उड़ जाएँगे – बादलों के पार, एक मजेदार सफ़र पर, वहाँ तक जहाँ धरती और समुद्र मिलते हैं, जहाँ लहरें हल्के से आकर पहाड़ों से
इसी बीच, भालू के दो छोटे बच्चे घूमते-घूमते बूढ़े बलूत तक आ जाते हैं। एक पल को उनकी माँ की नज़र उनसे हटती है और दोनों दुनिया से निश्चिंत ताज़ी रसभरी को खाने की कोशिश करने में व्यस्त हो जाते हैं। विशाल बलूत चुपचाप उन्हें ऐसा करते हुए देखता रहता है।
उन रसभरियों की मधुर सुगंध धीरे-धीरे हवा में घुलने लगती है और पत्तों के बीच बहने लगती है… बूढ़ा…