Tereza Sebesta
बर्फ़ की आख़िरी बूंद
सुबह-सुबह, एक लटकी हुई बर्फ की बूंद एक नल के ऊपर जागी और एक नया दिन देखकर बहुत खुश हुई। लेकिन... यह क्या है? उसे एहसास हुआ कि वह गलती से बहुत देर से जागी थी। सर्दियां खत्म हो चुकी थीं। अब वह क्या करेगी?


एक दिन उत्तर दिशा से बहुत तेज़ हवा चल
समुद्र के ऊपर, वो ऐसी ऊँची लहरें
यहाँ तक कि दूसरी जगह से उड़कर आने वाले पक्षी भी किसी दूसरी जगह जाने के लिए रास्ता बदल लेते थे, क्योंकि इतनी ताक़तवर हवा के ख़िलाफ़ उड़ना उनके पंखों को थका देता था।
एक दिन, ज़मीन से बहुत ऊँचाई पर उड़ते हुए, उत्तरी हवाओं की मुलाक़ात सूरज से हो गई। हवा ने चमकते हुए सूरज का मज़ाक उड़ाते हुए घमंड से कहा, "बेहतर होगा कि तुम मेरे रास्ते से हट जाओ, वरना मैं तुम्हें इतनी दूर उड़ा दूंगी कि तुम इस ज़मीन पर फिर कभी रोशनी नहीं डाल पाओगे" उसने धमकाते हुए कहा।
लेकिन सूरज को हवा की ये धमकी बिल्कुल पसंद नहीं आई। वह हवा को ख़ुद से ऐसे बात नहीं करने दे सकता था क्योंकि वो भी कोई कम ताक़तवर नहीं था। बस फिर क्या था, दोनों आपस में झगड़ने लगे कि ज़्यादा
हवा तुरंत एक धूल भरी आँधी चलाकर अपनी ताक़त दिखाना चाहती थी, लेकिन सूरज ने उसे रोक लिया। अब उन्होंने एक शर्त लगाई। जो भी पहले उस तीर्थयात्री का कोट उतरवा देगा, वही ज़्यादा…