रसोई के फर्श से कुछ रहस्यमयी आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। पहले चूँ-चूँ, फिर छप-छप, उसके बाद क्लिक-क्लैक-क्लैक!
सेड्रिक नामक कनख़जूरे यानी सेंटीपीड ने अपनी सबसे अच्छी टोपी और सबसे बड़ी लाल पोल्का-डॉट वाली बो टाई पहन रखी थी। कई पैर होने के कारण उसे शतपाद भी कहा जाता है। उसने अपने सभी पसंदीदा जूते पहन रखे थे। उसे एक ही चीज़ सबसे ज्यादा पसंद थी और वो यह थी कि उसे एक और जोड़ी नए जूते मिल जाएं।
अपने जूतों से बारी-बारी से अलग-अलग आवाज़ें सुनना उसे बहुत पसंद था। उसके स्नीकर्स बिना किसी आवाज़ के 'चुपके से' चलते थे, इसी वजह से उन जूतों को यह नाम मिला। उसके नए ढंग के और बेहद ऊँची एड़ी के जूते रसोई की फर्श पर लगाए लिनोलियम कवर पर एक मज़ेदार खटखट की आवाज़ पैदा कर रहे थे, जिस पर वह सरक रहा था।
सेड्रिक आज बहुत अच्छे मूड में था: "मैं जल्द ही और बड़ा हो जाऊंगा और अपनी केंचुली उतारूंगा, और फिर मेरे पास कुछ अतिरिक्त पैर होंगे - एक बिलकुल नई जोड़ी जूते के लिए," बड़ी मुस्कान के साथ उसने खुद से कहा। फिलहाल, उसके पास केवल दस जोड़ी पैर थे। जिसका मतलब था कि वह एक बार में केवल दस जोड़ी जूते ही पहन सकता था। लेकिन उसके जूतों के संग्रह में पचास से ज़्यादा जोड़ी जूते थे। इसलिए वह बड़ा होने तथा एक साथ और भी ज़्यादा जूते पहनने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था!
वह खुशी-खुशी रसोईघर में चला गया, इस उम्मीद में कि कोई उसके सुंदर, चमकदार, खड़खड़ाते जूतों पर ध्यान देगा।
लेकिन ऊपर बैठे इंसानों ने शायद उसके खूबसूरत जूतों की आवाज़ें नहीं सुनी। दरअसल, उसने देखा, जब वह तेज़ी से आगे बढ़ रहा था तो उन लोगों का उस पर ध्यान भी नहीं गया। कभी-कभी, वे उससे …