आज रात हम लोग निकलने वाले हैं, एक बेहद रोमांचक सफ़र पर। तो निश्चिंत हो जाइए, अपनी आंखें बंद कीजिए और अपने पूरे शरीर, यानी हाथ, पैर, गर्दन सभी को ढीला छोड़ दीजिए…सिर्फ़ अपनी साँसों पर ध्यान लगाइए। अपनी नाक से एक गहरी साँस लीजिए और धीरे-धीरे अपने मुँह से साँस छोड़िए।
एक बार फ़िर साँस लीजिए और फ़िर से छोड़िए। एक और गहरी साँस लीजिए और धीरे-धीरे छोड़िए। हर एक साँस के साथ आप अधिक निश्चिंत और आरामदायक महसूस करेंगे।
आइए, अब उस सफ़र पर चलते हैं जिसका हमने वादा किया था। कल्पना कीजिए कि आप अपने शरीर के हर हिस्से तक पहुंच सकते हैं, हर अंग तक जा सकते हैं। यहां तक कि हर उस कोशिका तक जो आपके शरीर को बनाती है।
हम आपके सिर यानी दिमाग से शुरू करेंगे क्योंकि हमारे सारे विचार वहीं रहते हैं। कई बार जब ये विचार हमारे दिमाग में लगातार बातें कर रहें होते हैं तो बहुत शरारती बन जाते हैं। कल्पना करो कि वे एक बालवाड़ी में बहुत सारे छोटे-छोटे शरारती बच्चों जैसे हैं, जो हर समय चीख़ते-चिल्लाते रहते हैं।
पर हम कोशिश करेंगे कि उन्हें थोड़ा शांत कराएं। चलिए उन विचारों को बिस्तर पर सुला देते हैं। शरारती विचार तो पहले से ही थक चुके हैं। देखिए तो, कैसे जम्हाई ले रहें हैं, सोने को एकदम तैयार हैं। ये आपके साथ आराम कर सकते हैं।
अब धीरे-धीरे आपकी आँखों की ओर चलते हैं। कैसा लग रहा है वहाँ? कल्पना कीजिए, एक बड़ा सा घास का मैदान है जिसमें रंग-बिरंगे फूल ऐसे कोमलता से लहरा रहें हैं जैसे नरम हवा उन्हें दुलार रही हो। ये वो बारीक कोशिकाएँ हैं जिनकी वज़ह से हमारी आँखें अपने आस-पास की दुनिया देखती हैं। इन पर लगातार प्रकाश पड़ता है जिससे ये वो छवि बनाते हैं जिसे हम…