नींद का मारा बिलौटा बेचारा!

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यह कहानी उस छोटे-से बिलौटे की है, जिसे बहुत नींद आ रही है। उसे सोने के लिए एक नरम तकिया चाहिए। लेकिन वह उसे कहां मिलेगा? हमारे सबसे कम उम्र के श्रोताओं के लिए यह सुकूनभरी सोने से पहले की कहानी है, जो उन्हें बिल्ली के छोटे बच्चे के साथ सबसे आरामदायक झपकी लेने की जगह खोजने के लिए एक नींद भरी यात्रा पर ले जाती है।
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बाहर धीरे-धीरे अंधेरा हो रहा था। आसमान का रंग गुलाबी से बैंगनी और फिर गहरे नीले रंग में बदल गया था। कुछ ही समय बाद, घरों के ऊपर कुछ तारे टिमटिमाने लगे।

एक छोटा भूरा बिलौटा यानी बिल्ली का बच्चा, फार्महाउस के दरवाज़े पर बैठा, अपने होंठ चाट रहा था और जम्हाई ले रहा था। वह खेत में खेलने के लिए बाहर जाने का इंतजार कर रहा था, लेकिन उससे पहले वह थोड़ी देर झपकी लेना चाहता था।

उसने दरवाज़े के कोने में दुबकने की कोशिश की, लेकिन वह जगह ठीक नहीं थी। पत्थर सख्त था और क्योंकि अभी सूरज नहीं चमक रहा था, इसलिए बहुत ठंड थी। उसने अपने पंजों को गर्म रखने के लिए अपनी घनी पूंछ को पंजों के चारों ओर लपेटने की कोशिश की। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह सो नहीं सका।

“मुझे एक तकिया चाहिए,” बिलौटे ने खुद से कहा। “एक नरम, मुलायम तकिया जिसमें दुबककर सोया जा सके।”

बिलौटा उठ खड़ा हुआ। घर से दूर चला गया और बगीचे के रास्ते से होते हुए खेत के पास आंगन में तकिया ढूंढ़ने लगा। पूरा आंगन शांत था। भेड़ों की रक्षा करने वाला झबरू कुत्ता पहले से ही अपने घर में खर्राटे ले रहा था, और भेड़ें, जिन्हें बहुत ज़्यादा शोर मचाना पसंद था, रात के लिए अपने बाड़े में चली गई थीं। अब केवल घास में हवा की हल्की सरसराहट और कुछ कीड़ों की चीं-चीं की आवाजें ही सुनाई दे रही थीं।

बिलौटे ने मुर्गीघर में झांका। यह मुर्गियों से भरा हुआ था, सभी आराम से अपने बसेरे पर बैठी हुई थीं। बाड़े में भूसा बिछा हुआ था जो बहुत ही प्यारा और मुलायम लग रहा था!

“मेरे प्यारे मुर्गी मित्रों,” बिलौटे ने थके हुए स्वर में कहा, “आपको कोई तकलीफ़ तो नहीं होगी, अगर मैं यहां झपकी ले लूं तो? मैं…

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