एक बार की बात है, शरद ऋतु यानि पतझड़ का मौसम था। रॉनी और उसके माता-पिता एक सुंदर नए घर में रहने आए। रॉनी को अपना नया कमरा सजाना बहुत अच्छा लग रहा था जिसमें उसने मुलायम कंबल, एक नई अलमारी, रंग-बिरंगा लैम्प और दीवारों पर ढेर सारी तस्वीरें लगाईं। पूरा कमरा ऐसे चमचमा रहा था मानो नया हो और बहुत ही सुंदर लग रहा था।
जब अगला रविवार आया तो परिवार ने नए घर की पार्टी रखी और रॉनी के सारे रिश्तेदारों को बुलाया।
रॉनी की मम्मी ने दोपहर के खाने में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाए जैसे कद्दू का सूप, शाहबलूत की प्यूरी और बहुत सारे लज़ीज़ व्यंजन। सभी मेहमान बातें कर रहे थे, कोई सुंदर वॉलपेपर की तारीफ़ कर रहा था, कोई सुंदर नए फ्रिज की, और कोई बालकनी के शानदार नज़ारे की।
सभी लोग रॉनी के लिए तोहफ़े भी लेकर आए थे। उसकी नानी उसके लिए गमले में एक टमाटर का पौधा लाई थीं। उसकी मौसी भी एक सुंदर पौधा लाईं जिसमें फूल और बैंगनी रंग के तिकोने पत्ते थे, जो एक तरह की तीन पत्ती की घास थी। राॅनी की दादी उसके लिए कॉफ़ी का एक अनोखा पौधा लाई थीं।
उन्होंने रॉनी को कहा,“इनकी देखभाल करना। समय-समय पर पानी देना, तब देखना ये कैसे तुम्हारे कमरे को और भी सुंदर बना देंगे।” रॉनी ने हाँ में सिर हिलाया, लेकिन अंदर ही अंदर वह सोच रही थी, काश किसी ने मुझे एक टी-शर्ट या मोबाइल का कवर गिफ्ट किया होता।
उसने पौधों को अपने कमरे की खिड़की पर रख दिया और अपनी सबसे अच्छी दोस्त को मैसेज भेजने बैठ गई। उसे पौधों की बिल्कुल याद नहीं रही। अगले दिन भी उसे पौधों का ख्याल नहीं आया, और तीसरे दिन…