

सबसे पहली पिताजी को जम्हाई आई और ये कोई मामूली जम्हाई नहीं थी। ऐसा लग रहा था कि वो चाय का पूरा कप ही निगलने
वो उदास होकर बोलीं, “ओह, मैं इतनी थक गई हूं कि मुझे ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा।”
उनके दो छोटे बच्चे जय और विकी, सोफ़े पर बैठे हुए थे। उन्हें दूर से देखकर ही लग रहा था कि वो दोनों अपने पसंदीदा खेल के बारे में बातें कर रहे हैं, जैसा कि आमतौर पर छोटे लड़के करते हैं। पर ये सब देखने के बाद अब वो उस चीज़ के बारे में ज़्यादा चिंतित थे जो कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण थी। उन दोनों को दिख रहा था कि उनके माता-पिता कितने थके हुए थे।
“देखो,” जय ने चिंतित होते हुए कहा, “बेचारे पिताजी! वो निचोडी हुई एक टी बैग के जैसे लग रहे हैं, जिसे पहले ही कम से कम तीन बार चाय में डुबोया जा चुका है और माँ को देखो, उनमें तो जैसे कोई ताकत ही नहीं
दोनों भाइयों ने तय किया कि वो अपने माँ-पिताजी को शांति