छोटा एडी अपने परिवार के साथ इंग्लैंड में ब्रिस्टल नामक शहर के पास एक छोटे से फ़ार्म में रहता था। उसके पिता एक सम्मानित डॉक्टर थे और अक्सर काम के सिलसिले में वह विदेश जाया करते थे। एडी अपनी मां के साथ घर पर रहता था। जब वह बहुत छोटा था, तब भी उसे फ़ार्म में मदद करना पसंद था। वह मुर्गीघर से अंडे इकट्ठा करता और सूअरों, भेड़ों और गायों को उनका खाना खिलाता।
सभी जानवरों में उसे गायें सबसे अच्छी लगती थीं। उसने उनका दूध निकालना और उनके रहने की जगह को साफ़ करना सीखा और कभी-कभी तो वह पूरी दोपहर उनके साथ बिताता था। उसने अपनी पसंदीदा गाय का नाम डॉट रखा, क्योंकि उसकी बाईं आंख के ऊपर तीन छोटे भूरे धब्बे थे। डॉट के साथ समय बिताते हुए एडी कभी ऊबता नहीं था: वह उसकी देखभाल करता था, वे साथ खेलते थे और जब एडी उदास होता, तो वह उसकी गर्दन के चारों ओर लगे मुलायम फ़र में सिर घुसाकर रोता था।
एक सुबह एडी गौशाला में आया तो उसने देखा कि डॉट ने हमेशा की तरह उसका स्वागत नहीं किया है। सभी गायें पानी के नांद (चौड़े मुंह वाला मिट्टी या पत्थर का बर्तन) के पास उदास खड़ी थीं। कुछ तो गड़बड़ थी। ही वह उनका दूध दुहने वाला था, तभी उसने देखा कि उनके थन लाल थे और उन पर बहुत सारे छाले थे। जैसे ही एडी ने उन्हें छुआ, गायें दर्द से चिल्लाने लगीं।
“माँ! गायें बीमार हैं!” एडी चिल्लाया और घर की ओर भागा। वह बहुत डरा हुआ था।
उसने जो देखा था, उसकी जानकारी जैसे ही उसने अपनी मां को दी, उन्होंने रसोई भंडार से मरहम का एक छोटा डिब्बा निकाला। उन्होंने एडी को समझाया कि जब गायों को ये दाने निकलते हैं, तो हर दिन उनके थनों पर…