

“माँ, दरवाज़े पर कोई है,” जूली ने ज़ोर से आवाज़ लगाते
“हाँ, हाँ,” जूली की माँ ने, लकड़ी का चम्मच नीचे रखते हुए जवाब दिया, जिसका इस्तेमाल वो सूप को हिलाने के लिए कर रहीं थीं, “बस मैं अभी दरवाज़ा खोलने ही
जूली ने अपना ब्रश रंगों में डुबोना ज़ारी रखा। वो बहुत ध्यान से चित्र बना रही थी। जैसे ही वो रंगने के लिए चित्र पर ज़्यादा ध्यान देती, उसकी जीभ बाहर आ जाती और भौहें सिकुड़ जाती। जब उसको ये संतुष्टि हो गई कि अब चित्र पूरा हो गया है, उसने सिर ऊपर उठाया और देखा कि उसकी माँ वापिस आ गईं थीं।
“कौन था माँ?” जूली ने उत्सुकता
“ज़रा अंदाजा लगाओ…” उसकी माँ ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। उनके हाथों में फलों और सब्जियों से भरा एक बक्सा था, “विटामिन की हमारी ताज़ी खेप आ गई है!”
जूली की आंखें उत्साह से चमक उठीं। वह अपनी कुर्सी से तेज़ी से कूदी और अपनी माँ की
जूली ने बक्से का एक कोना पकड़ा और उसे रसोईघर की मेज़ तक ले जाने में अपनी माँ की मदद
जूली ने एक बड़ी सी, चमकती, गाढ़ी बैंगनी रंग की
“यह नाशपाती नहीं है,…